कुंडली दोष कैसे पढ़ें और उनके उपाय – आसान हिन्दी में पूरा मार्गदर्शन
Kundli Readingबहुत से लोग अपनी कुंडली बनवाते हैं और पंडित जी उनसे कहते हैं—
“आपकी कुंडली में यह दोष है…”,
“इस ग्रह का प्रभाव खराब है…”,
“उपाय करवाना पड़ेगा…”
और मन में एक ही सवाल उभरता है—
“आख़िर कुंडली दोष हैं क्या?”
“और कैसे पता चले कि यह दोष सच में है भी या नहीं?”
अगर आप भी यही जानना चाहते हैं कि
कुंडली दोष कैसे पहचाने जाते हैं,
कौन-से दोष सच में प्रभाव डालते हैं,
और उनका उपाय क्या होता है—
तो आप सही जगह पहुँचे हैं।
यह ब्लॉग आपको मानवीय और सरल हिन्दी में
कुंडली पढ़ना, दोष पहचानना और remedies समझाएगा।
कुंडली दोष क्या होता है?
सीधी भाषा में कहें तो:
कुंडली दोष मतलब ग्रहों की ऐसी स्थिति,
जो जीवन में रुकावट, संघर्ष, मानसिक तनाव या देरी पैदा करे।
दोष बुरा शब्द नहीं है।
दोष का मतलब “ग्रह का imbalance” है।
जैसे शरीर में किसी तत्व की कमी-बढ़त हो जाए तो दिक्कत आती है,
वैसे ही कुंडली में ग्रह imbalance होने पर जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं।
क्या हर कुंडली में दोष होता है?
हाँ।
हर इंसान की कुंडली में कुछ न कुछ दोष होते हैं।
यह सामान्य बात है।
पर फर्क पड़ता है कि:
• दोष कितना मजबूत है
• कौन-सा ग्रह कारण है
• वे किस घर में बैठे हैं
• और remedies से कितनी जल्दी balance हो सकता है
हर दोष जीवन बिगाड़ दे, ऐसा नहीं।
कुछ दोष तो जीवन को मजबूत भी करते हैं।
कुंडली दोष कैसे पढ़ें? – शुरूआत करने वालों के लिए आसान तरीका
अब असली बात पर आते हैं—कुंडली दोष पहचानना।
यह काम उतना कठिन नहीं जितना लोग समझते हैं।
अगर आप नीचे दिए गए “चार आसान नियम” समझ लें,
तो आप किसी भी कुंडली में दोष पहचान सकते हैं।
नियम 1: ग्रह किस घर में बैठा है?
सबसे पहला और सीधा तरीका:
ग्रह जिस घर में बैठता है, उसी के आधार पर दोष या शुभ फल तय होता है।
उदाहरण:
• मंगल 8वें घर में → संघर्ष, दुर्घटनाएँ
• चंद्रमा 6वें घर में → चिंता और मन बेचैन
• शनि 7वें घर में → शादी में देरी
• सूर्य 12वें घर में → पिता से दूरी या आत्मविश्वास की कमी
ग्रह की seat ही आधा फल तय कर देती है।
अगर आप यह हिस्सा विस्तार से सीखना चाहते हैं:
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नियम 2: ग्रह कितना मजबूत है?
दोष तभी माना जाता है जब ग्रह:
• नीच का हो
• पाप ग्रह के साथ बैठा हो
• दुश्मन राशि में हो
• अस्त हो
• या प्रभावित हो
उदाहरण:
चंद्रमा अगर राहु–केतु से घिर जाए
तो मन अस्थिर हो जाता है — इसे ग्रहण दोष कहते हैं।
सूर्य अगर शनि के साथ बैठ जाए
तो इसे शनि–सूर्य विरोध कहते हैं—
जिससे पिता से तनाव या मानसिक भार पैदा होता है।
यह सारी चीज़ें पढ़ना सीखना चाहते हैं?
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नियम 3: ग्रह किसका स्वामी है?
कई बार ग्रह खराब जगह पर बैठा होता है,
पर उसके फल जीवन में अच्छे आते हैं—
क्योंकि वह अच्छे घर का स्वामी होता है।
उदाहरण:
अगर शुक्र 10वें घर का मालिक है
और 8वें घर में बैठा है—
तो नौकरी में उतार-चढ़ाव तो देगा,
पर अंत में अच्छा पद भी देता है।
यही कारण है कि Lal Kitab में स्वामित्व बहुत महत्वपूर्ण माना गया है:
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नियम 4: ग्रह पर किसका प्रभाव है?
ग्रह दोष तभी मजबूत होता है जब:
• उस पर पाप ग्रह (राहु–केतु–शनि–मंगल) का दृष्टि प्रभाव हो
• वह कमजोर हो
• वह अकेला हो
उदाहरण:
अगर चंद्रमा पर शनि की दृष्टि हो
तो मन पर भारीपन आता है।
लेकिन अगर गुरु पास बैठा हो
तो यह दोष काफी हद तक समाप्त हो जाता है।
यही कारण है कि कुंडली में
“ग्रह पड़ोस” बहुत महत्वपूर्ण है।
अब बात करते हैं असली चीज़ की—
सबसे आम कुंडली दोष और उनके Remedies
नीचे वे दोष हैं जो ज्यादातर कुंडलियों में पाए जाते हैं
और जिन्हें समझना बहुत आसान है।
मंगल दोष (मंगlik दोष)
लोग इसे बहुत डरावना मान लेते हैं।
पर सच यह है कि मंगल दोष हमेशा खराब नहीं होता।
यह दोष तब बनता है जब मंगल:
• 1st house
• 4th house
• 7th house
• 8th house
• 12th house
में बैठा हो।
इसके प्रभाव:
• क्रोध
• रिश्तों में तनाव
• शादी में देरी
• ऊर्जा का imbalance
Remedies:
• मंगलवार को गुड़ दान
• हनुमान चालीसा
• मसूर दाल दान
• लाल कपड़े से परहेज
और अगर आप मंगल को और गहराई से समझना चाहते हैं:
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शनि दोष
शनि अगर life में परीक्षा देता है
तो वह मेहनत, देरी और संघर्ष बढ़ाता है।
शनि दोष कब बनता है?
• शनि चतुर्थ, सप्तम, अष्टम घर में
• शनि लग्न पर प्रभाव डालता हो
• शनि चंद्र से 8वीं स्थिति में हो
इसके प्रभाव:
• नौकरी में स्थिरता नहीं
• मानसिक दबाव
• जिम्मेदारियाँ अधिक
• समय की देरी
Remedies:
• शनिवार को तेल दान
• काला तिल
• काले कपड़े का कम उपयोग
• शनि मंदिर दर्शन
राहु–केतु दोष
राहु–केतु shadow planets हैं।
ये डर, भ्रम और अचानक घटनाओं को नियंत्रित करते हैं।
दोष कब बनता है?
• राहु/केतु चंद्र के पास हो
• लग्न में हो
• 8वें घर में हो
• पाप ग्रह के साथ मिल जाए
असर:
• उलझन
• अचानक घटनाएँ
• मन का स्थिर न रहना
• रिश्तों में गलतफहमी
Remedies:
• नारियल दान
• रात्रि में पौधा न काटना
• हवन
• जप
इस विषय को समझने का सबसे सरल तरीका CIL गुरु का Remedy Course है:
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चंद्र दोष
चंद्रमा मन का ग्रह है।
इसमें दोष होने पर जीवनभाव पर असर पड़ता है।
असर:
• चिंता
• मन उदास
• रिश्तों में असंतुलन
• नींद की समस्या
Remedies:
• चावल दान
• दूध से स्नान
• चांद को जल चढ़ाना
• माता की सेवा
क्या कुंडली दोष वास्तव में जीवन बदल देते हैं?
नहीं — अगर remedies की जाएँ।
हाँ — अगर बिल्कुल अनदेखा कर दिया जाए।
कुंडली दोष समस्याएँ बताते हैं,
उपाय समाधान बताता है।
दोनों मिलकर Balance बनाते हैं।
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कुंडली दोष पढ़ने वालों के लिए Extra Tips
• YouTube पर टुकड़ों में मत सीखें
• पहले आधार समझें, फिर remedies
• एक ही गुरु को follow करें
• अपनी कुंडली से शुरुआत न करें
• दूसरों की कुंडली से अभ्यास करें
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मार्गदर्शन चाहिए?
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कुंडली दोष पढ़ना और remedies सिखाए—
तो आप सीधे यहाँ से बात कर सकते हैं:
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FAQs – People Also Ask
कुंडली दोष कैसे पता लगे?
ग्रह की स्थिति, घर, दृष्टि और स्वामित्व देखकर पता चलता है।
क्या remedies सच में असर करती हैं?
हाँ, remedies ग्रह संतुलन बनाती हैं।
क्या हर गलत घटना दोष की वजह से होती है?
नहीं, पर कई घटनाओं में दोष का योगदान होता है।
क्या दोष हट सकता है?
कई remedies से दोष काफी हद तक कम हो जाता है।
