कुंडली पढ़ने का 2 आसान तरीके
Kundli Readingआजकल ज्योतिष में बढ़ती रुचि के कारण बहुत लोग कुंडली पढ़ने का तरीका सीखना चाहते हैं, ताकि वे अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय सही दिशा में ले सकें। कुंडली या जन्मपत्री हमारे जन्म के समय ग्रहों की स्थिति का एक खगोलीय नक्शा है, जिसमें संपूर्ण जीवन की संभावनाएं, अवसर, संघर्ष और सफलता का मार्ग छिपा होता है। पहले ऐसा माना जाता था कि कुंडली केवल एक अनुभवी ज्योतिषी ही पढ़ सकता है, लेकिन यदि सही तरीका समझ लिया जाए, तो कोई भी व्यक्ति स्वयं अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण आसानी से कर सकता है। इस लेख में हम आसान भाषा में कुंडली पढ़ने का तरीका सात सरल चरणों के माध्यम से सीखेंगे, जिससे कि शुरुआती भी समझ सकें।
कुंडली पढ़ने का तरीका क्यों जानना जरूरी है?
कुंडली जीवन के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे करियर, विवाह, धन, स्वास्थ्य, शिक्षा, संतान, विदेश यात्रा और भाग्य का दर्पण मानी जाती है। जब हम कुंडली पढ़ने का तरीका समझ लेते हैं, तब हम जीवन के उतार-चढ़ाव को समझकर बेहतर निर्णय ले सकते हैं। यह व्यक्ति को स्वयं की क्षमताओं और कमजोरियों का बोध कराता है, जिससे जीवन में संतुलन बनाकर आगे बढ़ना आसान हो जाता है। इसलिए, हर व्यक्ति के लिए कुंडली पढ़ना जानना अत्यंत उपयोगी है।
कुंडली पढ़ने का तरीका – 2 आसान चरण
1️⃣ लग्न (Ascendant) पहचानें
कुंडली पढ़ने की सबसे पहली और महत्वपूर्ण प्रक्रिया है लग्न को पहचानना। लग्न बताता है कि जन्म के समय पूर्व दिशा में कौन-सी राशि उदय थी। यह व्यक्ति के व्यक्तित्व, सोच, शरीर, स्वास्थ्य और जीवन की शुरुआत को दर्शाता है। बिना लग्न को समझे किसी भी कुंडली का विश्लेषण अधूरा माना जाता है। इसलिए कुंडली पढ़ने का तरीका सीखते हुए सबसे पहले लग्न का निर्धारण करें।
जन्म कुंडली बीज है, लेकिन दशा और गोचर उस बीज को फल देते हैं। इसलिए भविष्यफल हमेशा दशा देखकर ही बताया जाता है।
यही वास्तविक और व्यावहारिक कुंडली पढ़ने का तरीका है।
कुंडली पढ़ने का तरीका सीखना बिल्कुल कठिन नहीं है। यदि आप इन सात चरणों का अभ्यास करते हैं, तो आप स्वयं अपनी या दूसरों की कुंडली का सफल विश्लेषण कर सकते हैं। यह ज्ञान जीवन में सही दिशा देने वाला प्रकाश है
शुभ-अशुभ ग्रह पहचानने का तरीका, हाँ, Lal Kitab भाव को ग्रह से अधिक महत्व देता है और उपाय सरल व व्यवहारिक होते हैं।
पहला कदम: लग्न को पहचानना
लग्न मतलब शुरुआत।
यही आपकी कुंडली की नींव है।
लग्न से ही तय होता है कि:
- कौन-सा ग्रह कैसा फल देगा
- कौन-सा घर कितना मजबूत है
- किस ग्रह से आपको फायदा या नुकसान होगा
लग्न को हमेशा “कुंडली का पहला घर” मानकर चलिए।
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दूसरा कदम: पहला कदम: लग्न को पहचानना
ग्रहों को समझो समझो
2️⃣ ग्रहों की स्थिति (Planetary Placement) देखें
हर ग्रह किसी विशेष जीवन क्षेत्र को प्रभावित करता है:
- सूर्य – आत्मा, पिता, प्रतिष्ठा
- चंद्र – मन, माता, भावनाएँ
- मंगल – साहस, भूमि, ऊर्जा
- बुध – बुद्धि, व्यापार
- गुरु – धन, ज्ञान, भाग्य
- शुक्र – प्रेम, कला, वैवाहिक सुख
- शनि – कर्म, परिश्रम, न्याय
- राहु – भौतिक इच्छाएँ
- केतु – आध्यात्मिकता
अगर घर समझ गए—
तो आधी कुंडली पढ़ना सीख गए।
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FAQs
कुंडली पढ़ना कितना समय लेता है?
अगर सही तरीके से सीखें तो 30–45 दिन में शुरुआत हो जाती है।
क्या यह हिन्दी में सीखना आसान है?
हाँ, बहुत आसान। शब्द खुद ही समझ आते हैं।
क्या इसके लिए संस्कृत ज़रूरी है?
नहीं। बिल्कुल नहीं।
क्या मैं खुद की कुंडली पढ़ सकता हूँ?
पहले दूसरों की पढ़िए, फिर अपनी पढ़ना आसान लगेगा।
निष्कर्ष
कुंडली पढ़ना मुश्किल नहीं है—
बस क्रम पता होना चाहिए।
अगर आप ऊपर बताए सात कदम समझ लेते हैं,
तो आप जन्म पत्रिका को एक नई नज़र से देख पाएँगे।
